भूतिया कुआं।। SHORT STORIES FOR KIDS IN HINDI ~ Findfullforms

यह कहानी हैं दो छोटे बच्चे हर्ष और माधुरी की। एक दिन की बात है माधुरी आवाज दे-देकर हर्ष-हर्ष बोल रही थी तभी हर्ष अचानक उसके सामने आकर माधुरी को डरा देता हैं। इसके बाद डरा कर भागता हुआ बोलता है मधुरा डरपोक मधुरा डरपोक हैं। इसके बाद मधुरा सोचती है रुको आज में तुम्हे मजा छका कर ही रहूंगी।
तभी उसकी मम्मी आती है और बोलती है क्या हुआ रुक जाओ दोनों तो मधुरा बोलती है की ये हर्ष का बच्चा मुझे सता रहा हैं। 

इसके बाद हर्ष बोलता हैं - नही, माँ माधुरी डरपोक हैं। 

माधुरी बोलती है - नहीं, माँ ऐसी कोई बात नहीं हैं। 

फिर हर्ष बोलता है - में अँधेरे कमरे में था तो माधुरी वह आयी तो मैंने उससे अचानक डराया तो मधुरा दर गयी। 

इसके बाद माँ ये सारी बात सुन लेती है और बोलती है की आज में तुमको एक डरावनी कहानी सुनाती हु। इसके बाद हर्ष खुश और माधुरी डर जाती है तो माँ बोलती है डरने की बात नहीं है यह एक कहानी तुम्हारे लिए ही  है।
एक समय की बात है किसी गांव में एक भूतिया कुआं था।  उस गांव के सभी लोग कुए के आस-पास भी भटकने से डरते थे। उस  कुएं के पास एक बरगद का पेड़ था। गांव के सभी लोग मिलकर उस कुएं के के बारे में डरावनी कहानियां सुनाया करते थे। गांव के बुड्ढे बच्चे जवान सभी उसे कुए के पास जाने से डरते शिवाय एक आदमी के जिसका नाम था- शंभू लोहार।

 शंभू लोहार एक बहुत ही मेहनती आदमी था।  वह दिन भर लोहे को पीट-पीटकर नए औजार बनाया करता था। एक दिन  शंभू अपने दो दोस्तों के साथ बैठा बातें कर रहा था तभी शंभू का एक दोस्त बोलता है- सुना है आजकल भूतिया कुए ने एक आदमी की जान ले ली, दूसरा दोस्त बोलता है- पता नहीं, उस कुआं में ऐसा क्या है।

शंभू बोलता है- भूत-वूत कुछ भी नहीं होता है यह मन से बनाई हुई कहानियां है।

सम्भु का दोस्त बोलता है -  तुम बहुत साहसी हो अगर तुमको ऐसा लगता है तो इस को सिद्ध करके बताओ कि भूत कुछ भी नहीं होते हैं और बोलता है आज शर्त लगा ही लेते हैं। 

शंभू बोलता है - हां जरूर क्यों नहीं, मैं इस को सिद्ध करके ही बताऊंगा और बोलता है- बताओ क्या शर्त है। 

 शंभू का दोस्त - तुम्हें आधी रात को उस कुएं के पास जाना होगा और उसके पास जो बरगद का पेड़ है उसके एक डाल तोड़ कर लेकर आनी होगी।

शंभू का दूसरा दोस्त - अगर तुम अपना काम कर पाए तो उसी डाल को तोड़ कर लाने के ₹500 देंगे।

शंभू बोलता है - अरे वाह, इससे तो मेरे पूरे महीने का राशन का सामान आ जाएगा और बोला मुझे तुम्हारी शर्त मंजूर है।

उस रात जैसा तय हुआ था रात को तीनों मित्र चौराहे पर गए। चौराहे पर जाकर दोनों मित्रों ने बोला कि यहां से आगे अब तुम्हें ही जाना है हम यहां तुम्हारी प्रतीक्षा करेंगे। इसके बाद  शंभू चौराहे से  भूतिया कुआं की ओर आगे निकल पड़ा। वैसे ही रात बहुत हो चुकी थी तो अंधेरा का बहुत गहरा था। जंगल में  जाते ही जंगली जानवरों की आवाज आ रही थी। उसी समय संभू को कुछ चमगादड़ की आवाजें सुनाई दे तो वह डर गया लेकिन वह रुका नहीं आगे बढ़ गया। वह चलता रहा और भूतिया कुआं के पास चला गया। शंभू बरगद के पेड़ के पास गया और डाली तोड़ने लगा तभी उसको पेड़ के अंदर एक दो आखे वाली चीज देखी तो वह बहुत डर गया और वह दो आँखे वाली चीज बाहर निकलकर उड़ने लगी तो देखा कि वह उल्लू है। शंभू ने डाली को तोड़ दिया और वह उस चौराहे पर गया जहां उसके मित्र उसकी प्रतीक्षा कर रहे थे और बोला- देख लो मैंने साबित कर दिया।  उसके दोनों मित्रों ने बोला- क्या भूत ने तुम्हारे साथ कुछ नहीं किया।
 इस बात का सब्बू बोला- अगर भूत होता तो कुछ करता ना, वह सिर्फ एक उल्लू था जिसे देख कर लोग भूत समझ बैठते थे और उससे  ₹500 ले लिए और वह बहुत खुश हुआ। 

    शिक्षा [Moral Stories]    

इस कहानी से हमें यह सीख मिलती है की भूत-वूत कुछ नहीं होता है दरसल यह हमारे मन का बहम होता है जिसे हम ही बढ़ावा देते हैं। अतः हमें कभी किसी से नहीं डरना चाइये।